Synrok - Mobile HTML Template
  • TUE, OCT 13
  • 09:30 AM

श्री दुर्गा सप्तशती महिमा

<h1>श्री दुर्गा सप्तशती महिमा: तुलसीवन आश्रम में 13 से 16 अक्टूबर तक विशेष धार्मिक आयोजन</h1> <p>बृज की पावन धरती वृंदावन में धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों की अपनी विशेष परंपरा रही है। इसी क्रम में <strong>श्री दुर्गा सप्तशती महिमा</strong> को समर्पित एक विशेष धार्मिक आयोजन का आयोजन <strong>तुलसीवन आश्रम, वृंदावन</strong> में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम <strong>13 से 16 अक्टूबर</strong> तक चलेगा, जिसमें श्रद्धालुओं को देवी उपासना, दुर्गा सप्तशती के आध्यात्मिक महत्व और सनातन परंपराओं से जुड़े विषयों को सुनने और समझने का अवसर मिलेगा।</p> <p>इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक चेतना के साथ-साथ <strong>गौसेवा और सेवा कार्यों</strong> को भी प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम <strong>गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला के सहायतार्थ</strong> आयोजित किया जा रहा है, जिससे धार्मिक आयोजन के माध्यम से सेवा की भावना को भी बढ़ावा दिया जा सके।</p> <h2>श्री दुर्गा सप्तशती महिमा का विशेष आयोजन</h2> <p>दुर्गा सप्तशती हिंदू धर्म की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। इसमें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, उनकी शक्ति और असुर शक्तियों पर धर्म की विजय का वर्णन मिलता है। श्रद्धा और आस्था के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं श्रवण करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।</p> <p>वृंदावन में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम इसी धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपरा को लोगों तक पहुंचाने का एक प्रयास है। आयोजन के दौरान <strong>श्री कौशिक जी महाराज</strong> द्वारा धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर मार्गदर्शन किया जाएगा।</p> <p>उनके प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालु देवी उपासना, सनातन धर्म की मान्यताओं और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझ सकेंगे।</p> <h2>13 से 16 अक्टूबर तक चलेगा कार्यक्रम</h2> <p>यह विशेष आयोजन <strong>13 अक्टूबर से 16 अक्टूबर</strong> तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल होने वाले श्रद्धालु निर्धारित समय के अनुसार तुलसीवन आश्रम पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं।</p> <p>कार्यक्रम का समय <strong>सुबह 9:30 बजे से</strong> निर्धारित किया गया है। सुबह का समय धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है, इसलिए श्रद्धालु समय से पहले कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर शांतिपूर्वक आयोजन में शामिल हो सकते हैं।</p> <p>चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में भक्तों को आध्यात्मिक वातावरण में कथा, सत्संग और धार्मिक विचारों को सुनने का अवसर मिलेगा।</p> <h2>तुलसीवन आश्रम में होगा आयोजन</h2> <p>कार्यक्रम का आयोजन <strong>तुलसीवन आश्रम, वृंदावन</strong> में किया जा रहा है। यह स्थान <strong>श्याम कुटी के निकट, परिक्रमा मार्ग, वृंदावन, उत्तर प्रदेश</strong> में स्थित है।</p> <p>वृंदावन देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां वर्षभर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, कथा, सत्संग और भक्ति से जुड़े आयोजन होते रहते हैं। ऐसे में श्री दुर्गा सप्तशती महिमा का यह कार्यक्रम भी भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अवसर बन सकता है।</p> <p>कार्यक्रम में आने वाले श्रद्धालु वृंदावन के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ इस आयोजन में भी शामिल हो सकते हैं।</p> <h2>गौसेवा से जुड़ा है आयोजन</h2> <p>इस कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका <strong>गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला के सहायतार्थ</strong> आयोजित होना है। भारतीय सनातन परंपरा में गौसेवा को सेवा और धार्मिक आस्था से जोड़ा गया है।</p> <p>गौशाला से जुड़े सेवा कार्यों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक गतिविधियों के साथ सेवा कार्यों के महत्व को समझने का अवसर भी मिलेगा। आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सेवा, करुणा और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाना इस तरह के कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण पक्ष है।</p> <h2>श्री कौशिक जी महाराज के सानिध्य में सत्संग</h2> <p>कार्यक्रम में <strong>परम पूज्य आचार्य प्रवर श्री कौशिक जी महाराज</strong> का सानिध्य रहेगा। उनके द्वारा श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर संबोधित किया जाएगा।</p> <p>सत्संग के दौरान भक्तों को धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक जीवन से संबंधित विचार सुनने का अवसर मिलेगा। आज की व्यस्त जीवनशैली में कुछ समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग के लिए निकालना मन को शांति देने वाला अनुभव हो सकता है।</p> <h2>घर बैठे भी जुड़ सकेंगे श्रद्धालु</h2> <p>जो श्रद्धालु किसी कारणवश वृंदावन पहुंचकर कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे, उनके लिए भी आयोजन से जुड़ने का अवसर रहेगा। कार्यक्रम का <strong>सीधा प्रसारण (IST)</strong> किया जाएगा।</p> <p>इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले भक्त भी कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़कर सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम का लाभ ले सकेंगे। विशेष रूप से बुजुर्गों, दूर रहने वाले श्रद्धालुओं और यात्रा न कर पाने वाले भक्तों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है।</p> <h2>श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अवसर</h2> <p>श्री दुर्गा सप्तशती महिमा का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भक्ति, सत्संग और सेवा की भावना से जोड़कर देखा जा सकता है। वृंदावन जैसे आध्यात्मिक वातावरण में मां दुर्गा की महिमा से जुड़े विषयों को सुनना श्रद्धालुओं के लिए विशेष अनुभव हो सकता है।</p> <p><strong>13 से 16 अक्टूबर तक सुबह 9:30 बजे से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम</strong> में शामिल होने के इच्छुक श्रद्धालु तुलसीवन आश्रम, निकट श्याम कुटी, परिक्रमा मार्ग, वृंदावन पहुंच सकते हैं। कार्यक्रम में भाग लेते समय स्थानीय व्यवस्था और आश्रम के निर्देशों का पालन करना उचित रहेगा।</p> <p>धार्मिक आस्था, सत्संग और गौसेवा के इस विशेष आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण में समय बिताने और सनातन परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। वृंदावन आने वाले भक्त इस अवसर को अपनी धार्मिक यात्रा का हिस्सा बना सकते हैं।</p>
  • SUN, OCT 18
  • 03:00 PM

शक्ति महिमा कार्यक्रम 2026

<h1 data-pm-slice="1 1 []">शक्ति महिमा कार्यक्रम 2026: 18 अक्टूबर को देहरादून में पूज्य महाराज श्री की दिव्य धर्म यात्रा</h1> <p>सनातन धर्म, गौसेवा, तप और लोककल्याण के पावन संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से <strong>शक्ति महिमा कार्यक्रम 2026</strong> का आयोजन रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को देहरादून, उत्तराखंड में किया जाएगा। यह कार्यक्रम पूज्य महाराज श्री की धर्म यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसमें श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।</p> <p>कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक परंपराओं को प्रोत्साहित करना और समाज में गौसेवा, तप, धर्म तथा लोककल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। देहरादून की पावन धरती पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।</p> <h2>शक्ति महिमा कार्यक्रम 2026 की प्रमुख जानकारी</h2> <p>शक्ति महिमा कार्यक्रम में सम्मिलित होने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए आयोजन से जुड़ी प्रमुख जानकारी निम्नलिखित है।</p> <ul data-spread="false"> <li> <p><strong>कार्यक्रम का नाम:</strong> शक्ति महिमा</p> </li> <li> <p><strong>कार्यक्रम की तिथि:</strong> रविवार, 18 अक्टूबर 2026</p> </li> <li> <p><strong>कार्यक्रम का समय:</strong> दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक</p> </li> <li> <p><strong>कार्यक्रम का स्थान:</strong> गीता भवन, श्री सनातन धर्म गीता चैरिटेबल कमेटी बिल्डिंग</p> </li> <li> <p><strong>पता:</strong> थाना रोड, गांधी चौक के पास, देहरादून, उत्तराखंड &ndash; 248001</p> </li> <li> <p><strong>कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता:</strong> पूज्य महाराज श्री कौशिक जी महाराज</p> </li> <li> <p><strong>आयोजक की ओर से उल्लेख:</strong> गौसेवा, तप और लोककल्याण के संदेश को समर्पित धर्म यात्रा</p> </li> </ul> <p>श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल होने से पहले आयोजन स्थल और समय से संबंधित जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं, ताकि उन्हें कार्यक्रम में पहुँचने में सुविधा हो।</p> <h2>क्या है शक्ति महिमा कार्यक्रम का उद्देश्य?</h2> <p>शक्ति महिमा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और समाज कल्याण के मूल्यों को समझने का एक अवसर है। भारतीय सनातन परंपरा में शक्ति को सृजन, संरक्षण, साहस, ज्ञान और कल्याण की प्रेरणा के रूप में देखा जाता है। शक्ति की उपासना मनुष्य को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने और जीवन में सकारात्मक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है।</p> <p>इस कार्यक्रम के माध्यम से गौसेवा, तप और लोककल्याण जैसे विषयों के महत्व को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। धर्म का वास्तविक स्वरूप केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति करुणा, जरूरतमंदों की सहायता, जीवों के प्रति संवेदना और समाज के हित में कार्य करना भी इसका महत्वपूर्ण अंग है।</p> <p>शक्ति महिमा का संदेश है कि आध्यात्मिक जीवन और सामाजिक सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। जब धर्म के साथ सेवा का भाव जुड़ता है, तब समाज में सहयोग, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को प्रोत्साहन मिलता है।</p> <h2>पूज्य महाराज श्री कौशिक जी महाराज की धर्म यात्रा</h2> <p>पूज्य महाराज श्री कौशिक जी महाराज के धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदेशों में सनातन संस्कृति, गौसेवा, तप और मानव कल्याण जैसे विषयों का विशेष स्थान है। धर्म यात्रा के माध्यम से इन विषयों पर लोगों को जागरूक करने और उन्हें सेवा के कार्यों से जुड़ने की प्रेरणा देने का प्रयास किया जाता है।</p> <p>शक्ति महिमा कार्यक्रम इसी धर्म यात्रा की कड़ी के रूप में देहरादून में आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में सहभागिता कर सकेंगे और धर्म तथा सेवा से जुड़े विचारों को समझने का अवसर प्राप्त करेंगे।</p> <p>ऐसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से परिचित कराने में भी सहायक हो सकते हैं।</p> <h2>गौसेवा और लोककल्याण का विशेष संदेश</h2> <p>भारतीय संस्कृति में गौसेवा को करुणा, समर्पण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण प्रतीक माना गया है। गौमाता की सेवा के अंतर्गत उनके लिए चारा, स्वच्छ जल, सुरक्षित आश्रय और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था करना शामिल है।</p> <p>गौशालाओं में रहने वाली वृद्ध, बीमार और बेसहारा गायों की देखभाल के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है। समाज के लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार इन कार्यों में सहयोग देकर सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा सकते हैं।</p> <p>गौसेवा के साथ-साथ लोककल्याण का भाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जरूरतमंदों की सहायता, अन्नदान, चिकित्सा सेवा और शिक्षा से जुड़े प्रयास समाज में सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।</p> <p>शक्ति महिमा कार्यक्रम का संदेश भी इन सेवा मूल्यों को प्रोत्साहित करने से जुड़ा है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को यह समझने का अवसर मिलता है कि आस्था के साथ संवेदनशीलता और सेवा भाव का होना भी आवश्यक है।</p> <h2>सनातन धर्म में शक्ति उपासना का महत्व</h2> <p>सनातन धर्म में शक्ति उपासना की एक समृद्ध परंपरा रही है। माँ दुर्गा, माँ काली, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती जैसे देवी स्वरूप शक्ति के विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयामों का प्रतिनिधित्व करते हैं। कहीं शक्ति को साहस और रक्षा का प्रतीक माना जाता है, तो कहीं ज्ञान, समृद्धि और विवेक की प्रेरणा के रूप में पूजा जाता है।</p> <p>शक्ति की आराधना व्यक्ति को आंतरिक दृढ़ता, आत्मविश्वास और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती है। आध्यात्मिक दृष्टि से शक्ति का अर्थ केवल बाहरी सामर्थ्य नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग पर चलने का साहस भी है।</p> <p>शक्ति महिमा जैसे धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं को इन मूल्यों पर चिंतन करने और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देने का माध्यम बन सकते हैं।</p> <h2>देहरादून में आयोजित होगा शक्ति महिमा कार्यक्रम</h2> <p>उत्तराखंड की राजधानी देहरादून प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक-सांस्कृतिक वातावरण के लिए जानी जाती है। यहाँ विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों में श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसी क्रम में 18 अक्टूबर 2026 को शक्ति महिमा कार्यक्रम का आयोजन गीता भवन में किया जाएगा।</p> <p>कार्यक्रम में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे आयोजन स्थल पर समय से पहुँचने की योजना बनाएँ। सार्वजनिक परिवहन, निजी वाहन और स्थानीय यातायात की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा की तैयारी करना उपयोगी रहेगा।</p> <p>यदि आप परिवार के सदस्यों या परिचितों के साथ कार्यक्रम में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो उनके साथ कार्यक्रम की तिथि, समय और पते की जानकारी पहले से साझा कर सकते हैं।</p> <h2>शक्ति महिमा कार्यक्रम में क्यों शामिल हों?</h2> <p>धार्मिक आयोजनों में सहभागिता का महत्व केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं होता। ऐसे अवसर व्यक्ति को अपनी परंपराओं को समझने, आध्यात्मिक विचारों पर चिंतन करने और समाज के प्रति अपने दायित्वों को पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं।</p> <p>शक्ति महिमा कार्यक्रम में शामिल होने के कुछ प्रमुख उद्देश्य हो सकते हैं:</p> <ul data-spread="false"> <li> <p>सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ना।</p> </li> <li> <p>गौसेवा, जीव सेवा और लोककल्याण के महत्व को समझना।</p> </li> <li> <p>आध्यात्मिक विचारों और धार्मिक संदेशों को सुनने का अवसर प्राप्त करना।</p> </li> <li> <p>परिवार और समाज में सेवा, सहयोग तथा सद्भाव की भावना को प्रोत्साहित करना।</p> </li> <li> <p>अपनी सामर्थ्य के अनुसार जनकल्याणकारी कार्यों में योगदान देने की प्रेरणा प्राप्त करना।</p> </li> </ul> <p>कार्यक्रम में सहभागिता श्रद्धालुओं के लिए धर्म और सेवा के मूल्यों पर विचार करने का एक अवसर होगी।</p> <h2>कार्यक्रम में पहुँचने से पहले ध्यान रखें</h2> <p>शक्ति महिमा कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले श्रद्धालु कुछ आवश्यक बातों का ध्यान रख सकते हैं।</p> <ol data-spread="false" start="1"> <li> <p>कार्यक्रम की तिथि 18 अक्टूबर 2026 और समय दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक ध्यान में रखें।</p> </li> <li> <p>आयोजन स्थल का पूरा पता पहले से सुरक्षित कर लें।</p> </li> <li> <p>देहरादून के स्थानीय यातायात को ध्यान में रखते हुए समय से निकलें।</p> </li> <li> <p>कार्यक्रम स्थल पर स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखें।</p> </li> <li> <p>अन्य श्रद्धालुओं के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव रखें।</p> </li> <li> <p>कार्यक्रम से संबंधित किसी भी अतिरिक्त जानकारी के लिए आयोजकों से संपर्क करें।</p> </li> </ol> <p>इन बातों का ध्यान रखने से कार्यक्रम में आपकी सहभागिता अधिक सुविधाजनक हो सकती है।</p> <h2>शक्ति महिमा कार्यक्रम 2026: धर्म, सेवा और समर्पण का संदेश</h2> <p>शक्ति महिमा कार्यक्रम 2026 धर्म, आध्यात्मिकता और लोककल्याण के मूल्यों से जुड़ने का एक अवसर है। रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को देहरादून के गीता भवन में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम पूज्य महाराज श्री कौशिक जी महाराज की धर्म यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।</p> <p>गौसेवा, तप, सनातन संस्कृति और मानव कल्याण के संदेश को आत्मसात करना इस आयोजन की भावना का प्रमुख हिस्सा है। ऐसे अवसर हमें याद दिलाते हैं कि सच्ची आस्था के साथ सेवा, करुणा, अनुशासन और सद्भाव का जीवन में विशेष स्थान है।</p> <p>आप भी इस धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होकर धर्म और सेवा से जुड़े विचारों को जानने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं। अपने परिवार और परिचितों के साथ कार्यक्रम की जानकारी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आयोजन के विषय में जान सकें।</p> <p><strong>कार्यक्रम विवरण एक नजर में:</strong> शक्ति महिमा | 18 अक्टूबर 2026 | दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक | गीता भवन, थाना रोड, गांधी चौक के पास, देहरादून, उत्तराखंड &ndash; 248001।</p> <p><em>नोट: कार्यक्रम में शामिल होने से पहले तिथि, समय और आयोजन स्थल की जानकारी आयोजकों से एक बार अवश्य सुनिश्चित कर लें।</em></p>
  • WED, OCT 28
  • 10:00 AM

श्रीमद्भागवत कथा 2026 – पुष्कर, राजस्थान

<h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" data-end="185" data-section-id="9au12l" data-start="134" dir="auto">श्रीमद्भागवत कथा 2026 &ndash; पुष्कर, राजस्थान</h1> <p data-end="537" data-start="233" dir="auto">धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में कथा श्रवण करने वाले श्रद्धालुओं के लिए वर्ष 2026 में एक विशेष आयोजन होने जा रहा है। <strong data-end="471" data-start="351">पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन पुष्कर, राजस्थान में किया जाएगा।</strong> यह धार्मिक आयोजन <strong data-end="521" data-start="489">28 अक्टूबर से 05 नवम्बर 2026</strong> तक आयोजित होगा।</p> <p data-end="820" data-start="539" dir="auto">श्रीमद्भागवत कथा भारतीय सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखती है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों और आध्यात्मिक संदेशों से जुड़ी कथा को श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ सुनते हैं। इस आयोजन में श्रद्धालुओं को कथा श्रवण और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करने का अवसर मिलेगा।</p> <h2 data-end="861" data-section-id="18ncdxo" data-start="822" dir="auto">पुष्कर में कब होगी श्रीमद्भागवत कथा?</h2> <p data-end="889" data-start="863" dir="auto">श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन:</p> <p data-end="1060" data-start="891" dir="auto"><strong data-end="902" data-start="891">दिनांक:</strong> 28 अक्टूबर से 05 नवम्बर 2026<br data-end="934" data-start="931" /> <strong data-end="944" data-start="934">स्थान:</strong> जाट विश्राम स्थली मंदिर के पास<br data-end="978" data-start="975" /> <strong data-end="986" data-start="978">शहर:</strong> पुष्कर, राजस्थान<br data-end="1006" data-start="1003" /> <strong data-end="1022" data-start="1006">संत सानिध्य:</strong> पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज</p> <p data-end="1197" data-start="1062" dir="auto">कार्यक्रम में शामिल होने की योजना बना रहे श्रद्धालु आयोजन की निर्धारित तिथियों को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की तैयारी कर सकते हैं।</p> <h2 data-end="1235" data-section-id="1bdzir4" data-start="1199" dir="auto">श्रीमद्भागवत कथा का धार्मिक महत्व</h2> <p data-end="1461" data-start="1237" dir="auto">श्रीमद्भागवत कथा भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सनातन आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी महत्वपूर्ण कथा परंपरा है। इसमें भगवान के विभिन्न स्वरूपों और लीलाओं के साथ-साथ भक्ति, धर्म, सेवा और सदाचार से जुड़े विचारों का वर्णन किया जाता है।</p> <p data-end="1652" data-start="1463" dir="auto">कथा श्रवण को धार्मिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। श्रद्धालु कथा के माध्यम से भगवान की लीलाओं को सुनने के साथ उनके जीवन से जुड़े आध्यात्मिक संदेशों को समझने का प्रयास करते हैं।</p> <p data-end="1753" data-start="1654" dir="auto">कथा का वातावरण भक्तिमय होता है, जिसमें श्रद्धालु सामूहिक रूप से धार्मिक प्रसंगों का श्रवण करते हैं।</p> <h2 data-end="1804" data-section-id="1g29ept" data-start="1755" dir="auto">पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के सानिध्य में आयोजन</h2> <p data-end="1898" data-start="1806" dir="auto">इस आयोजन का संचालन <strong data-end="1882" data-start="1825">पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य</strong> में किया जाएगा।</p> <p data-end="2078" data-start="1900" dir="auto">धार्मिक कथा और सत्संग भारतीय परंपरा में आध्यात्मिक चिंतन का माध्यम रहे हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालु धार्मिक कथाओं और सनातन परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्राप्त करते हैं।</p> <h2 data-end="2118" data-section-id="t9zij2" data-start="2080" dir="auto">पुष्कर में कथा आयोजन का विशेष महत्व</h2> <p data-end="2358" data-start="2120" dir="auto">पुष्कर राजस्थान का प्रसिद्ध धार्मिक नगर है और यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं। ऐसे धार्मिक वातावरण में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए कथा श्रवण के साथ आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करने का अवसर प्रदान करता है।</p> <p data-end="2545" data-start="2360" dir="auto">जो श्रद्धालु बाहर से पुष्कर आ रहे हैं, वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना सकते हैं। आयोजन स्थल तक पहुंचने, ठहरने और स्थानीय यात्रा से संबंधित जानकारी पहले से प्राप्त करना उपयोगी रहेगा।</p> <h2 data-end="2579" data-section-id="1efnnwa" data-start="2547" dir="auto">श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर</h2> <p data-end="2781" data-start="2581" dir="auto">श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने वाले श्रद्धालु परिवार के साथ कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। कथा श्रवण के दौरान धार्मिक प्रसंगों और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े विषयों को सुनने का अवसर मिलेगा।</p> <p data-end="2901" data-start="2783" dir="auto">धार्मिक आयोजनों में सामूहिक रूप से शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और सामाजिक सहभागिता का अनुभव भी प्रदान करता है।</p> <h2 data-end="2928" data-section-id="1fhjwfg" data-start="2903" dir="auto">आयोजन की मुख्य जानकारी</h2> <p data-end="3225" data-start="2930" dir="auto"><strong data-end="2944" data-start="2930">कार्यक्रम:</strong> श्रीमद्भागवत कथा<br data-end="2964" data-start="2961" /> <strong data-end="2989" data-start="2964">आयोजक/संबंधित संस्था:</strong> विश्व जागरण मानव सेवा संघ चैरि. ट्रस्ट &ndash; गौतीय तुलसी तपोवन गौशाला, वृन्दावन<br data-end="3068" data-start="3065" /> <strong data-end="3084" data-start="3068">संत सानिध्य:</strong> पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज<br data-end="3125" data-start="3122" /> <strong data-end="3134" data-start="3125">तिथि:</strong> 28 अक्टूबर से 05 नवम्बर 2026<br data-end="3166" data-start="3163" /> <strong data-end="3176" data-start="3166">स्थान:</strong> जाट विश्राम स्थली मंदिर के पास, पुष्कर, राजस्थान</p> <h2 data-end="3244" data-section-id="ly0bos" data-start="3227" dir="auto">संपर्क जानकारी</h2> <p data-end="3311" data-start="3246" dir="auto">कार्यक्रम से संबंधित जानकारी के लिए निम्न संपर्क नंबर दिए गए हैं:</p> <p data-end="3344" data-start="3313" dir="auto"><strong data-end="3327" data-start="3313">9258031399</strong><br data-end="3330" data-start="3327" /> <strong data-end="3344" data-start="3330">9258041399</strong></p> <p data-end="3447" data-start="3346" dir="auto"><strong data-end="3367" data-start="3346">पंजीकृत कार्यालय:</strong><br data-end="3370" data-start="3367" /> Tulsivan Ashram, Parikrama Marg, Panighat, Vrindavan (Mathura), Uttar Pradesh</p> <p data-end="3586" data-start="3449" dir="auto">कार्यक्रम में जाने से पहले श्रद्धालु इन नंबरों पर संपर्क करके कार्यक्रम की तिथि, आयोजन स्थल और अन्य आवश्यक जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं।</p> <h2 data-end="3622" data-section-id="kkkgz9" data-start="3588" dir="auto">सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रण</h2> <p data-end="3653" data-start="3624" dir="auto"><strong data-end="3653" data-start="3624">आप सभी सादर आमंत्रित हैं।</strong></p> <p data-end="3864" data-start="3655" dir="auto">यदि आप धार्मिक कथा और सत्संग में रुचि रखते हैं और पुष्कर में होने वाले इस आयोजन में शामिल होना चाहते हैं, तो <strong data-end="3796" data-start="3764">28 अक्टूबर से 05 नवम्बर 2026</strong> की तिथियों को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।</p> <p data-end="4013" data-start="3866" dir="auto"><strong data-end="4013" data-start="3866">श्रीमद्भागवत कथा 2026 पुष्कर में होने वाला एक धार्मिक आयोजन है, जिसमें श्रद्धालुओं को कथा श्रवण और आध्यात्मिक वातावरण से जुड़ने का अवसर मिलेगा।</strong></p>
  • MON, NOV 16
  • 11:00 AM

गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026:

<h1>गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026: तुलसीवन आश्रम वृंदावन में 16 से 24 नवंबर तक होगा श्री हरिवंश पुराण आयोजन</h1> <p><strong>गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026</strong> के अवसर पर वृंदावन में धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन <strong>16 नवंबर से 24 नवंबर 2026</strong> तक <strong>तुलसीवन आश्रम, परिक्रमा मार्ग, वृंदावन</strong> में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन <strong>पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में</strong> किया जाएगा।</p> <p>इस आयोजन के साथ <strong>श्री हरिवंश पुराण</strong> का उल्लेख भी किया गया है। तुलसीवन आश्रम और गौसेवा से जुड़े इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक वातावरण के साथ गौसेवा से जुड़ने का अवसर भी रहेगा।</p> <h2>गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026 कब है?</h2> <p><strong>गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026 का आयोजन 16 नवंबर से 24 नवंबर 2026</strong> तक किया जाएगा।</p> <p>कार्यक्रम का प्रमुख स्थान है:</p> <p><strong>तुलसीवन आश्रम, परिक्रमा मार्ग, वृंदावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश।</strong></p> <p>श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल होने से पहले आयोजन से संबंधित समय, कथा की दैनिक व्यवस्था या अन्य जानकारी के लिए दिए गए संपर्क नंबर पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p> <p><strong>कार्यक्रम की तारीख:</strong> 16&ndash;24 नवंबर 2026<br /> <strong>स्थान:</strong> तुलसीवन आश्रम, परिक्रमा मार्ग, वृंदावन<br /> <strong>जिला:</strong> मथुरा, उत्तर प्रदेश<br /> <strong>आयोजन:</strong> गोपाल अष्टमी महोत्सव एवं श्री हरिवंश पुराण<br /> <strong>सानिध्य:</strong> पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज</p> <h2>श्री हरिवंश पुराण का आयोजन</h2> <p>&nbsp;हरिवंश पुराण का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की वंश परंपरा और कृष्ण से जुड़े धार्मिक आख्यानों से माना जाता है। श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और उनकी लीलाओं से जुड़े ब्रज क्षेत्र में ऐसे धार्मिक आयोजनों का अपना विशेष महत्व है।</p> <p>वृंदावन आने वाले श्रद्धालु अक्सर मंदिरों के दर्शन, परिक्रमा और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। ऐसे में श्री हरिवंश पुराण का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक वातावरण में समय बिताने का अवसर प्रदान कर सकता है।</p> <p>कार्यक्रम में शामिल होने वाले श्रद्धालु आयोजन की निर्धारित व्यवस्था और समय के संबंध में पहले से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p> <h2>गोपाल अष्टमी महोत्सव का धार्मिक महत्व</h2> <p>गोपाल अष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनके गोपाल रूप से जुड़ा पर्व है। ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गौसेवा की परंपरा का विशेष स्थान है।</p> <p>भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी अनेक कथाओं में गायों और ग्वाल-बालों का उल्लेख मिलता है। इसी कारण ब्रज में गोपाल, गोविंद और गौसेवा से संबंधित धार्मिक परंपराएं आज भी श्रद्धा के साथ मनाई जाती हैं।</p> <p>गोपाल अष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के गोपाल स्वरूप का स्मरण करते हैं और गौसेवा तथा धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं।</p> <h2>तुलसीवन आश्रम में होगा आयोजन</h2> <p><strong>गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026</strong> का आयोजन <strong>तुलसीवन आश्रम, परिक्रमा मार्ग, वृंदावन</strong> में किया जाएगा।<br /> तुलसीवन आश्रम को <strong>गौ तीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला</strong> के रूप में भी जाना जाता है। यह ब्रज क्षेत्र में गौसेवा से जुड़ा आश्रम स्थल है।</p> <p><strong>आश्रम का पता:</strong><br /> <strong>Tulsivan Ashram, Parikrama Marg, Panighat, Vrindavan&ndash;281121, Mathura (U.P.), India</strong></p> <p>वृंदावन आने वाले श्रद्धालु कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए स्थानीय साधनों और स्थानीय लोगों की सहायता ले सकते हैं।</p> <h3>तुलसी तपोवन गौशाला और गौसेवा</h3> <p>इस कार्यक्रम की विशेषता यह भी है कि इसका आयोजन एक ऐसे स्थान पर किया जा रहा है जो <strong>गौसेवा गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।</strong></p> <p><strong>तुलसी तपोवन गौशाला</strong> ब्रज का एक सुंदर और मनोरम विशाल गौसेवा आश्रय स्थल है। यहां गौसेवा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं।</p> <p>कार्यक्रम के माध्यम से धार्मिक आयोजन और गौसेवा की भावना को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। श्रद्धालु आयोजन में शामिल होने के साथ-साथ आश्रम और गौसेवा से जुड़ी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p> <p>पूज्यश्री कौशिक जी महाराज का संदेश है:</p> <p><strong>&ldquo;जीवन भर गाय की सेवा करना ही मेरा कर्तव्य है।&rdquo;</strong></p> <p>इसी प्रकार गौरक्षा से संबंधित संदेश भी यहां प्रमुखता से दिया गया है।</p> <h3>वृंदावन में धार्मिक आयोजन में शामिल होने का अवसर</h3> <p>वृंदावन भारत के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों में से एक है। यहां वर्षभर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी से जुड़े मंदिरों के दर्शन करने आते हैं।</p> <p>गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026 के दौरान वृंदावन आने वाले श्रद्धालु अपने यात्रा कार्यक्रम में तुलसीवन आश्रम को भी शामिल कर सकते हैं।</p> <p>यदि आप <strong>16 से 24 नवंबर 2026</strong> के बीच वृंदावन आने की योजना बना रहे हैं, तो आयोजन की तारीखों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल और संपर्क जानकारी पहले से नोट कर लेना उपयोगी रहेगा।</p> <h3>गोपाल अष्टमी महोत्सव में जाने से पहले ध्यान रखें</h3> <p>कार्यक्रम में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए।</p> <p>सबसे पहले कार्यक्रम की <strong>तारीख और आयोजन स्थल</strong> की पुष्टि कर लें। यदि आप किसी विशेष दिन श्री हरिवंश पुराण या अन्य धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं, तो उसके समय की जानकारी आयोजकों से पहले प्राप्त करना बेहतर रहेगा।</p> <p>वृंदावन में धार्मिक स्थलों पर भीड़ विशेष अवसरों पर बढ़ सकती है। इसलिए बाहर से आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा, ठहरने और स्थानीय आवागमन की योजना पहले से बना सकते हैं।</p> <p>आश्रम परिसर में जाते समय वहां के नियमों और व्यवस्थाओं का पालन करना चाहिए। धार्मिक स्थल की स्वच्छता बनाए रखना और गौशाला में मौजूद गोवंश के साथ सावधानी रखना भी आवश्यक है।</p> <h3>तुलसीवन आश्रम कैसे पहुंचें?</h3> <p><strong>तुलसीवन आश्रम, परिक्रमा मार्ग, पानीघाट, वृंदावन</strong> में स्थित है।</p> <p>मथुरा और वृंदावन पहुंचने के बाद श्रद्धालु स्थानीय ऑटो, ई-रिक्शा या अन्य स्थानीय परिवहन साधनों की मदद से कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सकते हैं।</p> <p>बाहर से आने वाले श्रद्धालु मथुरा या वृंदावन में ठहरने की व्यवस्था पहले से कर सकते हैं, विशेषकर यदि वे 16 से 24 नवंबर के बीच कई दिनों तक कार्यक्रम में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।</p> <h3>कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी के लिए संपर्क</h3> <p>आयोजन से संबंधित जानकारी के लिए संपर्क नंबर:</p> <p><strong>9258031399</strong><br /> <strong>9258041399</strong></p> <p>यदि आपको <strong>गोपाल अष्टमी महोत्सव 2026 के कार्यक्रम का समय, किसी विशेष दिन की व्यवस्था, कथा से संबंधित जानकारी या आश्रम पहुंचने से जुड़ी जानकारी</strong> चाहिए, तो यात्रा से पहले दिए गए नंबरों पर संपर्क करके नवीनतम जानकारी प्राप्त करना उचित रहेगा।</p>
  • SAT, NOV 21
  • 10:00 AM

एकादशी व्रत उद्यापन

<h1>वृंदावन में एकादशी व्रत उद्यापन का विशेष आयोजन, श्री कौशिक जी महाराज का रहेगा सान्निध्य</h1> <p>श्रीधाम वृंदावन में धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों का अपना विशेष महत्व है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने के लिए पहुंचते हैं। इसी क्रम में वृंदावन स्थित <strong>गोतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला</strong> में एकादशी व्रत उद्यापन का विशेष आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक कार्यक्रम में पूज्य <strong>श्री कौशिक जी महाराज</strong> का सान्निध्य रहेगा।</p> <p>यह आयोजन उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर हो सकता है, जो एकादशी व्रत का उद्यापन धार्मिक वातावरण में करना चाहते हैं और साथ ही सेवा, दान तथा आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ना चाहते हैं। आयोजन के दौरान एकादशी व्रत उद्यापन के साथ कई धार्मिक गतिविधियां रखी गई हैं।</p> <h2>एकादशी व्रत उद्यापन का धार्मिक महत्व</h2> <p>सनातन परंपरा में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। श्रद्धालु अपनी आस्था और सामर्थ्य के अनुसार एकादशी के दिन उपवास, पूजा-पाठ और भजन आदि करते हैं। कई लोग लंबे समय तक एकादशी व्रत का पालन करने के बाद उसका विधि-विधान से उद्यापन भी करते हैं।</p> <p>उद्यापन को व्रत के संकल्प की पूर्णता से जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान पूजा-अर्चना के साथ दान, ब्राह्मण भोजन और सेवा जैसे कार्य किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे अवसरों पर श्रद्धा के साथ किए गए सेवा कार्य का विशेष महत्व माना जाता है।</p> <p>इस आयोजन में भी श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा का अवसर मिलेगा।</p> <ul> <li>एकादशी व्रत का विधि-विधान से उद्यापन</li> <li>ब्राह्मणों के लिए भोजन, वस्त्र दान और दक्षिणा</li> <li>धार्मिक वातावरण में पूजा और सेवा का अवसर</li> <li>तुलसी-शालिग्राम विवाह में शामिल होने का अवसर</li> </ul> <h2>वृंदावन में आयोजित होगा विशेष धार्मिक कार्यक्रम</h2> <p>एकादशी व्रत उद्यापन का यह आयोजन <strong>21 और 22 नवंबर</strong> को रखा गया है। इसके बाद <strong>23 नवंबर को तुलसी-शालिग्राम विवाह</strong> का आयोजन किया जाएगा। इस वजह से कार्यक्रम लगातार कई दिनों तक धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा रहेगा।</p> <p>वृंदावन में होने के कारण इस आयोजन का वातावरण भी विशेष रहने की उम्मीद है। यहां आने वाले श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल होने के साथ-साथ आसपास के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कर सकते हैं।</p> <p>जो लोग दूसरे शहरों से इस आयोजन में शामिल होने के लिए आ रहे हैं, उनके लिए पहले से यात्रा और रहने की योजना बनाना बेहतर रहेगा।</p> <h2>तुलसी-शालिग्राम विवाह रहेगा विशेष आकर्षण</h2> <p>एकादशी व्रत उद्यापन के बाद 23 नवंबर को तुलसी-शालिग्राम विवाह का आयोजन भी किया जाएगा। सनातन परंपरा में तुलसी और शालिग्राम को भगवान विष्णु से जुड़ा पवित्र स्वरूप माना जाता है। तुलसी विवाह से जुड़ी धार्मिक परंपरा विशेष रूप से श्रद्धालुओं के बीच महत्वपूर्ण स्थान रखती है।</p> <p>वृंदावन जैसे धार्मिक वातावरण में इस तरह के आयोजन में शामिल होना भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव हो सकता है। विवाह आयोजन के दौरान श्रद्धालु पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे।</p> <h2>ब्राह्मण भोजन और सेवा का अवसर</h2> <p>आयोजन में <strong>26 ब्राह्मणों के भोजन, वस्त्र दान और दक्षिणा</strong> की व्यवस्था भी रखी गई है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में ब्राह्मण भोजन और दान को सेवा भाव से किए जाने वाले धार्मिक कार्यों में शामिल किया जाता है।</p> <p>इस व्यवस्था के माध्यम से आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा कार्य से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा। ऐसे आयोजनों में सेवा का भाव कार्यक्रम को केवल पूजा तक सीमित नहीं रखता, बल्कि लोगों को सामाजिक और धार्मिक जिम्मेदारी से भी जोड़ता है।</p> <h2>बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास सुविधा</h2> <p>वृंदावन में होने वाले इस कार्यक्रम में दूसरे शहरों से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवास की व्यवस्था भी बताई गई है। जानकारी के अनुसार <strong>10 लोगों के लिए तीन दिनों तक तीन कमरों की सुविधा</strong> उपलब्ध रहेगी।</p> <p>चूंकि आवास की सुविधा सीमित है, इसलिए जो लोग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बाहर से आने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए पहले से संपर्क करके उपलब्धता की जानकारी लेना उचित रहेगा।</p> <h2>पूज्य श्री कौशिक जी महाराज का रहेगा सान्निध्य</h2> <p>इस धार्मिक आयोजन में पूज्य <strong>श्री कौशिक जी महाराज</strong> का सान्निध्य भी रहेगा। संत और आचार्यों के सान्निध्य में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।</p> <p>ऐसे अवसरों पर भक्तों को धार्मिक वातावरण में समय बिताने के साथ भक्ति और सेवा से जुड़ने का अवसर मिलता है। वृंदावन की पवित्र भूमि पर होने वाला यह आयोजन इसी भावना को आगे बढ़ाने वाला कार्यक्रम है।</p> <h2>आयोजन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी</h2> <p>यदि आप इस कार्यक्रम में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो आयोजन से पहले आयोजकों से संपर्क करके सभी जरूरी जानकारी प्राप्त कर लेना बेहतर रहेगा। विशेष रूप से बाहर से आने वाले श्रद्धालु आवास और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी पहले ले सकते हैं।</p> <p>कार्यक्रम की प्रमुख जानकारी इस प्रकार है:</p> <ol> <li><strong>आयोजन:</strong> एकादशी व्रत उद्यापन</li> <li><strong>उद्यापन की तिथि:</strong> 21&ndash;22 नवंबर</li> <li><strong>तुलसी-शालिग्राम विवाह:</strong> 23 नवंबर</li> <li><strong>स्थान:</strong> गोतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला, वृंदावन</li> <li><strong>ब्राह्मण सेवा:</strong> 26 ब्राह्मणों का भोजन, वस्त्र दान और दक्षिणा</li> <li><strong>आवास सुविधा:</strong> 10 लोगों के लिए 3 दिनों तक 3 कमरे</li> <li><strong>सेवा राशि:</strong> ₹71,000</li> <li><strong>संपर्क नंबर:</strong> 9258031399, 9219512704</li> </ol> <h2>श्रद्धालु कैसे ले सकते हैं हिस्सा?</h2> <p>जो श्रद्धालु इस आयोजन में एकादशी व्रत उद्यापन या संबंधित धार्मिक गतिविधियों में शामिल होना चाहते हैं, वे दिए गए संपर्क नंबरों पर आयोजकों से सीधे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम में स्थान और आवास की व्यवस्था सीमित होने के कारण पहले से संपर्क करना सुविधाजनक रहेगा।</p> <p>साथ ही, धार्मिक अनुष्ठान से संबंधित किसी विशेष नियम या व्यक्तिगत पूजा-विधि के बारे में जानकारी चाहिए तो आयोजन से जुड़े जिम्मेदार लोगों से पहले ही जानकारी लेना उचित होगा।</p> <h2>वृंदावन में भक्ति और सेवा का अवसर</h2> <p>वृंदावन की पहचान ही भक्ति, सेवा और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। यहां होने वाला प्रत्येक धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं को कुछ समय के लिए अपनी रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से अलग होकर आध्यात्मिक वातावरण में रहने का अवसर देता है।</p> <p>एकादशी व्रत उद्यापन के इस आयोजन में पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के साथ ब्राह्मण सेवा, दान और तुलसी-शालिग्राम विवाह जैसे कार्यक्रम भी जुड़े हैं। इसलिए यह आयोजन उन लोगों के लिए विशेष हो सकता है, जो वृंदावन आकर अपनी धार्मिक आस्था के अनुरूप किसी आयोजन में सहभागी बनना चाहते हैं।</p> <p><strong>गोतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला, वृंदावन</strong> में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक श्रद्धालु समय रहते संपर्क करके आयोजन से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p> <p><strong>संपर्क:</strong> 9258031399 | 9219512704</p>
  • SUN, DEC 20
  • 10:00 AM

श्री राम कथा 2026 – चित्रकूट

<h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" data-end="4059" data-section-id="1qad39i" data-start="4020" dir="auto">श्री राम कथा 2026 &ndash; चित्रकूट</h1> <p data-end="4353" data-start="4105" dir="auto">भगवान श्रीराम की कथा भारतीय सनातन परंपरा और धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी धार्मिक परंपरा से जुड़े एक विशेष आयोजन के रूप में <strong data-end="4353" data-start="4245">पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में श्री राम कथा का आयोजन चित्रकूट में किया जाएगा।</strong></p> <p data-end="4474" data-start="4355" dir="auto"><strong data-end="4410" data-start="4355">श्री राम कथा का आयोजन 20 दिसम्बर से 28 दिसम्बर 2026</strong> तक किया जाएगा। कार्यक्रम का स्थान <strong data-end="4470" data-start="4445">रामायण मेला, चित्रकूट</strong> है।</p> <p data-end="4592" data-start="4476" dir="auto">यह आयोजन श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम से जुड़े धार्मिक प्रसंगों और रामायण की कथा का श्रवण करने का अवसर प्रदान करेगा।</p> <h2 data-end="4631" data-section-id="tlpppt" data-start="4594" dir="auto">श्री राम कथा 2026 कब और कहां होगी?</h2> <p data-end="4673" data-start="4633" dir="auto">कार्यक्रम की मुख्य जानकारी इस प्रकार है:</p> <p data-end="4836" data-start="4675" dir="auto"><strong data-end="4689" data-start="4675">कार्यक्रम:</strong> श्री राम कथा<br data-end="4705" data-start="4702" /> <strong data-end="4714" data-start="4705">तिथि:</strong> 20 दिसम्बर से 28 दिसम्बर 2026<br data-end="4747" data-start="4744" /> <strong data-end="4757" data-start="4747">स्थान:</strong> रामायण मेला, चित्रकूट<br data-end="4782" data-start="4779" /> <strong data-end="4798" data-start="4782">संत सानिध्य:</strong> पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज</p> <p data-end="4988" data-start="4838" dir="auto">चित्रकूट धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों में शामिल है और भगवान श्रीराम से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है।</p> <h2 data-end="5022" data-section-id="jgm82o" data-start="4990" dir="auto">श्री राम कथा का धार्मिक महत्व</h2> <p data-end="5240" data-start="5024" dir="auto">श्री राम कथा के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन और रामायण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाता है। भारतीय संस्कृति में भगवान श्रीराम को मर्यादा, धर्म और कर्तव्य से जुड़े आदर्शों के रूप में स्मरण किया जाता है।</p> <p data-end="5443" data-start="5242" dir="auto">राम कथा में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े अनेक प्रसंगों का वर्णन किया जाता है। माता सीता, भगवान लक्ष्मण और भक्त हनुमान सहित रामायण के प्रमुख पात्रों से जुड़े प्रसंग भी राम कथा की परंपरा का हिस्सा हैं।</p> <p data-end="5547" data-start="5445" dir="auto">श्रद्धालु कथा श्रवण के माध्यम से इन धार्मिक प्रसंगों से जुड़ते हैं और रामायण की शिक्षाओं को सुनते हैं।</p> <h2 data-end="5581" data-section-id="tguoeh" data-start="5549" dir="auto">चित्रकूट में राम कथा का आयोजन</h2> <p data-end="5774" data-start="5583" dir="auto">चित्रकूट का नाम रामायण की धार्मिक परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि यहां आयोजित होने वाली श्री राम कथा श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक वातावरण में कथा श्रवण का अवसर प्रदान करेगी।</p> <p data-end="5951" data-start="5776" dir="auto">कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालु चित्रकूट पहुंच सकते हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा और ठहरने की व्यवस्था पहले से कर सकते हैं।</p> <h2 data-end="6001" data-section-id="1stv2e6" data-start="5953" dir="auto">पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में</h2> <p data-end="6098" data-start="6003" dir="auto">श्री राम कथा का आयोजन <strong data-end="6082" data-start="6025">पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य</strong> में किया जाएगा।</p> <p data-end="6325" data-start="6100" dir="auto">धार्मिक कथा, सत्संग और आध्यात्मिक कार्यक्रम भारतीय संस्कृति में लंबे समय से धार्मिक ज्ञान और परंपराओं से जुड़ने का माध्यम रहे हैं। श्री राम कथा के दौरान श्रद्धालुओं को रामायण से जुड़े धार्मिक प्रसंगों को सुनने का अवसर मिलेगा।</p> <h2 data-end="6371" data-section-id="13y7lyc" data-start="6327" dir="auto">श्रद्धालु परिवार के साथ हो सकते हैं शामिल</h2> <p data-end="6556" data-start="6373" dir="auto">श्री राम कथा में परिवार के साथ शामिल होकर श्रद्धालु धार्मिक वातावरण का अनुभव कर सकते हैं। कथा श्रवण के दौरान भगवान श्रीराम के जीवन और रामायण से जुड़े प्रसंगों को सुनने का अवसर मिलेगा।</p> <p data-end="6689" data-start="6558" dir="auto">जो लोग चित्रकूट की यात्रा की योजना बना रहे हैं, वे <strong data-end="6634" data-start="6609">20 से 28 दिसम्बर 2026</strong> की अवधि को ध्यान में रखकर अपना कार्यक्रम बना सकते हैं।</p> <h2 data-end="6720" data-section-id="1qwtked" data-start="6691" dir="auto">कार्यक्रम की मुख्य जानकारी</h2> <p data-end="6883" data-start="6722" dir="auto"><strong data-end="6736" data-start="6722">कार्यक्रम:</strong> श्री राम कथा<br data-end="6752" data-start="6749" /> <strong data-end="6761" data-start="6752">तिथि:</strong> 20 दिसम्बर से 28 दिसम्बर 2026<br data-end="6794" data-start="6791" /> <strong data-end="6804" data-start="6794">स्थान:</strong> रामायण मेला, चित्रकूट<br data-end="6829" data-start="6826" /> <strong data-end="6845" data-start="6829">संत सानिध्य:</strong> पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज</p> <p data-end="6972" data-start="6885" dir="auto"><strong data-end="6896" data-start="6885">निवेदक:</strong> विश्व जागरण मानव सेवा संघ चैरि. ट्रस्ट &ndash; गौतीय तुलसी तपोवन गौशाला, वृन्दावन</p> <h2 data-end="6991" data-section-id="ly0bos" data-start="6974" dir="auto">संपर्क जानकारी</h2> <p data-end="7056" data-start="6993" dir="auto">कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी के लिए निम्न संपर्क नंबर दिए गए हैं:</p> <p data-end="7089" data-start="7058" dir="auto"><strong data-end="7072" data-start="7058">9258031399</strong><br data-end="7075" data-start="7072" /> <strong data-end="7089" data-start="7075">9258041399</strong></p> <p data-end="7192" data-start="7091" dir="auto"><strong data-end="7112" data-start="7091">पंजीकृत कार्यालय:</strong><br data-end="7115" data-start="7112" /> Tulsivan Ashram, Parikrama Marg, Panighat, Vrindavan (Mathura), Uttar Pradesh</p> <p data-end="7333" data-start="7194" dir="auto">कार्यक्रम में जाने से पहले श्रद्धालु दिए गए संपर्क नंबरों पर संपर्क करके आयोजन की तिथि, स्थान और अन्य आवश्यक जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं।</p> <h2 data-end="7381" data-section-id="x39s23" data-start="7335" dir="auto">श्री राम कथा में सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रण</h2> <p data-end="7412" data-start="7383" dir="auto"><strong data-end="7412" data-start="7383">आप सभी सादर आमंत्रित हैं।</strong></p> <p data-end="7607" data-start="7414" dir="auto"><strong data-end="7508" data-start="7414">20 दिसम्बर से 28 दिसम्बर 2026 तक चित्रकूट के रामायण मेला में आयोजित होने वाली श्री राम कथा</strong> श्रद्धालुओं के लिए भगवान श्रीराम की कथा और रामायण से जुड़े धार्मिक प्रसंगों को सुनने का अवसर होगी।</p> <p data-end="7838" data-is-last-node="" data-is-only-node="" data-start="7609" dir="auto">यदि आप धार्मिक आयोजनों और कथा श्रवण में रुचि रखते हैं, तो इन तिथियों के दौरान चित्रकूट पहुंचकर कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। यात्रा से पहले आयोजन की तिथि, स्थान और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी आयोजकों से प्राप्त करना उचित रहेगा।</p>
  • SUN, FEB 21
  • 10:00 AM

पाँचवां गौ महोत्सव 2027: अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन

<h1 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" data-end="593" data-section-id="8qogk0" data-start="515" dir="auto">पाँचवां गौ महोत्सव 2027: अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन</h1> <p data-end="858" data-start="595" dir="auto">सनातन धर्म की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए वर्ष 2027 में एक विशेष आयोजन होने जा रहा है। <strong data-end="837" data-start="713">पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में पाँचवां गौ महोत्सव, अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा</strong> का आयोजन किया जाएगा।</p> <p data-end="1095" data-start="860" dir="auto">यह धार्मिक आयोजन <strong data-end="906" data-start="877">21 फरवरी से 10 मार्च 2027</strong> तक आयोजित होगा। कार्यक्रम का आयोजन <strong data-end="986" data-start="942">चौधा पुराना, करतार नगर, यमुनापार, दिल्ली</strong> में किया जाएगा। आयोजन में धार्मिक कथा, यज्ञ तथा सेवा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को विशेष स्थान दिया गया है।</p> <h2 data-end="1140" data-section-id="1f265se" data-start="1097" dir="auto">पाँचवां गौ महोत्सव 2027 कब और कहां होगा?</h2> <p data-end="1240" data-start="1142" dir="auto">पाँचवां गौ महोत्सव वर्ष 2027 में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम से जुड़ी मुख्य जानकारी इस प्रकार है:</p> <p data-end="1486" data-start="1242" dir="auto"><strong data-end="1256" data-start="1242">कार्यक्रम:</strong> पाँचवां गौ महोत्सव<br data-end="1278" data-start="1275" /> <strong data-end="1294" data-start="1278">विशेष आयोजन:</strong> अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा<br data-end="1340" data-start="1337" /> <strong data-end="1349" data-start="1340">तिथि:</strong> 21 फरवरी से 10 मार्च 2027<br data-end="1378" data-start="1375" /> <strong data-end="1388" data-start="1378">स्थान:</strong> चौधा पुराना, करतार नगर, यमुनापार, दिल्ली<br data-end="1432" data-start="1429" /> <strong data-end="1448" data-start="1432">संत सानिध्य:</strong> पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज</p> <p data-end="1589" data-start="1488" dir="auto">श्रद्धालु निर्धारित तिथियों के दौरान आयोजन स्थल पर पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं।</p> <h2 data-end="1619" data-section-id="dij6ud" data-start="1591" dir="auto">अतिरुद्र महायज्ञ का आयोजन</h2> <p data-end="1797" data-start="1621" dir="auto">इस गौ महोत्सव के अंतर्गत <strong data-end="1666" data-start="1646">अतिरुद्र महायज्ञ</strong> का आयोजन प्रमुख आकर्षण रहेगा। भगवान शिव को समर्पित धार्मिक अनुष्ठानों में रुद्र मंत्रों और शिव उपासना का विशेष महत्व माना जाता है।</p> <p data-end="1969" data-start="1799" dir="auto">अतिरुद्र महायज्ञ के दौरान धार्मिक विधि-विधान और यज्ञ परंपरा के माध्यम से भगवान शिव की आराधना की जाएगी। श्रद्धालु यज्ञ में शामिल होकर धार्मिक वातावरण का अनुभव कर सकते हैं।</p> <p data-end="2159" data-start="1971" dir="auto">यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान भारतीय सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालु सामूहिक रूप से धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं और आध्यात्मिक वातावरण से जुड़ते हैं।</p> <h2 data-end="2185" data-section-id="zoehgz" data-start="2161" dir="auto">श्री शिव महापुराण कथा</h2> <p data-end="2344" data-start="2187" dir="auto">पाँचवें गौ महोत्सव के साथ <strong data-end="2238" data-start="2213">श्री शिव महापुराण कथा</strong> का भी आयोजन किया जाएगा। शिव महापुराण भगवान शिव से संबंधित धार्मिक ग्रंथों और कथाओं की परंपरा से जुड़ा है।</p> <p data-end="2579" data-start="2346" dir="auto">शिव महापुराण कथा के माध्यम से भगवान शिव की महिमा, उनके विभिन्न स्वरूपों और उनसे जुड़े धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाता है। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालुओं को शिव भक्ति और सनातन धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।</p> <p data-end="2734" data-start="2581" dir="auto">कथा और सत्संग धार्मिक जीवन में आध्यात्मिक चिंतन का माध्यम माने जाते हैं। श्रद्धालु परिवार के साथ कथा में शामिल होकर धार्मिक वातावरण का अनुभव कर सकते हैं।</p> <h2 data-end="2784" data-section-id="1stv2e6" data-start="2736" dir="auto">पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य में</h2> <p data-end="2891" data-start="2786" dir="auto">इस विशेष धार्मिक आयोजन का आयोजन <strong data-end="2875" data-start="2818">पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज के पावन सानिध्य</strong> में किया जाएगा।</p> <p data-end="3117" data-start="2893" dir="auto">कथा, यज्ञ और गौसेवा जैसे धार्मिक एवं सेवा कार्यों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सनातन परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में आने वाले श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा गतिविधियों में भी अपनी सहभागिता कर सकते हैं।</p> <h2 data-end="3153" data-section-id="1rwlg28" data-start="3119" dir="auto">गौ सेवा को दिया गया विशेष स्थान</h2> <p data-end="3302" data-start="3155" dir="auto">पाँचवां गौ महोत्सव होने के कारण कार्यक्रम में <strong data-end="3212" data-start="3201">गौ सेवा</strong> को भी विशेष महत्व दिया गया है। आयोजन से जुड़ी गतिविधियों में गौसेवा की झलक दिखाई देती है।</p> <p data-end="3477" data-start="3304" dir="auto">भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में गाय को विशेष सम्मान दिया जाता है। गौ सेवा से जुड़े कार्यों के माध्यम से सेवा और करुणा की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है।</p> <p data-end="3615" data-start="3479" dir="auto">गौ महोत्सव में शामिल होने वाले श्रद्धालु गौ सेवा से जुड़ी गतिविधियों को देख सकते हैं और आयोजन से जुड़ी सेवा भावना का हिस्सा बन सकते हैं।</p> <h2 data-end="3637" data-section-id="u131yz" data-start="3617" dir="auto">अन्नपूर्णा भंडारा</h2> <p data-end="3823" data-start="3639" dir="auto">कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों में <strong data-end="3694" data-start="3673">अन्नपूर्णा भंडारा</strong> भी शामिल है। धार्मिक आयोजनों के दौरान भंडारे की परंपरा श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था से जुड़ी होती है।</p> <p data-end="3974" data-start="3825" dir="auto">अन्नपूर्णा भंडारा धार्मिक सेवा की परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस आयोजन में भी भंडारे के माध्यम से सेवा गतिविधि को स्थान दिया गया है।</p> <h2 data-end="4006" data-section-id="1a5k668" data-start="3976" dir="auto">वृक्षारोपण और पर्यावरण सेवा</h2> <p data-end="4177" data-start="4008" dir="auto">गौ महोत्सव के साथ <strong data-end="4040" data-start="4026">वृक्षारोपण</strong> से जुड़ी गतिविधियों को भी महत्व दिया गया है। वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्य है।</p> <p data-end="4321" data-start="4179" dir="auto">धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को जोड़ने से लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का अवसर मिलता है।</p> <h2 data-end="4352" data-section-id="1tlk6d6" data-start="4323" dir="auto">जल सेवा भी आयोजन का हिस्सा</h2> <p data-end="4522" data-start="4354" dir="auto">कार्यक्रम में <strong data-end="4379" data-start="4368">जल सेवा</strong> से संबंधित गतिविधि भी शामिल है। जल जीवन के लिए आवश्यक संसाधन है और जरूरतमंद लोगों तक पानी पहुंचाना सेवा कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।</p> <p data-end="4680" data-start="4524" dir="auto">गौ सेवा, अन्नपूर्णा भंडारा, वृक्षारोपण और जल सेवा जैसी गतिविधियों के माध्यम से इस आयोजन में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सेवा कार्यों को भी स्थान दिया गया है।</p> <h2 data-end="4722" data-section-id="1m7zbqy" data-start="4682" dir="auto">श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक अवसर</h2> <p data-end="4917" data-start="4724" dir="auto">पाँचवां गौ महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में शामिल होने का अवसर होगा। इस दौरान <strong data-end="4875" data-start="4830">अतिरुद्र महायज्ञ और श्री शिव महापुराण कथा</strong> जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p> <p data-end="5068" data-start="4919" dir="auto">जो श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति, कथा श्रवण, यज्ञ और धार्मिक आयोजनों में रुचि रखते हैं, वे निर्धारित तिथियों के दौरान कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।</p> <p data-end="5205" data-start="5070" dir="auto">बाहर से आने वाले श्रद्धालु यात्रा से पहले आयोजन स्थल और कार्यक्रम से जुड़ी नवीनतम जानकारी प्राप्त कर अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।</p> <h2 data-end="5236" data-section-id="1qwtked" data-start="5207" dir="auto">कार्यक्रम की मुख्य जानकारी</h2> <div class="group TyagGW_tableContainer" dir="auto"> <div class="TyagGW_tableWrapper flex flex-col-reverse w-fit" tabindex="-1"> <table class="w-fit min-w-(--thread-content-width)" data-end="5630" data-start="5238" dir="auto"> <thead data-end="5257" data-start="5238"> <tr data-end="5257" data-start="5238"> <th class="last:pe-10" data-col-size="sm" data-end="5248" data-start="5238">जानकारी</th> <th class="last:pe-10" data-col-size="md" data-end="5257" data-start="5248">विवरण</th> </tr> </thead> <tbody data-end="5630" data-start="5268"> <tr data-end="5298" data-start="5268"> <td data-col-size="sm" data-end="5276" data-start="5268">आयोजन</td> <td data-col-size="md" data-end="5298" data-start="5276">पाँचवां गौ महोत्सव</td> </tr> <tr data-end="5364" data-start="5299"> <td data-col-size="sm" data-end="5318" data-start="5299">प्रमुख कार्यक्रम</td> <td data-col-size="md" data-end="5364" data-start="5318">अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा</td> </tr> <tr data-end="5401" data-start="5365"> <td data-col-size="sm" data-end="5372" data-start="5365">तिथि</td> <td data-col-size="md" data-end="5401" data-start="5372">21 फरवरी से 10 मार्च 2027</td> </tr> <tr data-end="5454" data-start="5402"> <td data-col-size="sm" data-end="5410" data-start="5402">स्थान</td> <td data-col-size="md" data-end="5454" data-start="5410">चौधा पुराना, करतार नगर, यमुनापार, दिल्ली</td> </tr> <tr data-end="5506" data-start="5455"> <td data-col-size="sm" data-end="5465" data-start="5455">सानिध्य</td> <td data-col-size="md" data-end="5506" data-start="5465">पुराण मनीषी पूज्यश्री कौशिक जी महाराज</td> </tr> <tr data-end="5594" data-start="5507"> <td data-col-size="sm" data-end="5515" data-start="5507">आयोजक</td> <td data-col-size="md" data-end="5594" data-start="5515">विश्व जागरण मानव सेवा संघ चैरि. ट्रस्ट &ndash; गौतीय तुलसी तपोवन गौशाला, वृन्दावन</td> </tr> <tr data-end="5630" data-start="5595"> <td data-col-size="sm" data-end="5604" data-start="5595">संपर्क</td> <td data-col-size="md" data-end="5630" data-start="5604">9258031399, 9258041399</td> </tr> </tbody> </table> </div> </div> <h2 data-end="5660" data-section-id="rtqafa" data-start="5632" dir="auto">संपर्क एवं आवश्यक जानकारी</h2> <p data-end="5764" data-start="5662" dir="auto">कार्यक्रम से संबंधित जानकारी के लिए <strong data-end="5712" data-start="5698">9258031399</strong> और <strong data-end="5730" data-start="5716">9258041399</strong> नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।</p> <p data-end="5892" data-start="5766" dir="auto">आयोजन से संबंधित संस्था का पंजीकृत कार्यालय <strong data-end="5884" data-start="5810">तुलसीवन आश्रम, परिक्रमा मार्ग, पानीघाट, वृन्दावन (मथुरा), उत्तर प्रदेश</strong> में है।</p> <p data-end="6025" data-start="5894" dir="auto">यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कार्यक्रम की तारीख, आयोजन स्थल और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी पहले से प्राप्त करना उपयोगी रहेगा।</p> <h2 data-end="6061" data-section-id="kkkgz9" data-start="6027" dir="auto">सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रण</h2> <p data-end="6301" data-start="6063" dir="auto"><strong data-end="6129" data-start="6063">पाँचवां गौ महोत्सव, अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्री शिव महापुराण कथा</strong> में सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है। <strong data-end="6209" data-start="6180">21 फरवरी से 10 मार्च 2027</strong> तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक कथा, यज्ञ और विभिन्न सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।</p> <p data-end="6505" data-is-last-node="" data-is-only-node="" data-start="6303" dir="auto">श्रद्धालु परिवार के साथ कार्यक्रम में शामिल होकर <strong data-end="6471" data-start="6352">श्री शिव महापुराण कथा का श्रवण, अतिरुद्र महायज्ञ में सहभागिता तथा गौ सेवा, अन्नपूर्णा भंडारा, वृक्षारोपण और जल सेवा</strong> जैसी गतिविधियों से जुड़ सकते हैं।</p>